कुर्किहार से प्राप्त मूर्तियों में अंतर्निहित कला का प्राचीन मगध का इतिहास के साथ अंतर्संबंध
रवि भारद्वाज, शोध छात्र, इतिहास विभाग, मगध विश्वविद्यालय, बोधगया, बिहार.
प्रोफेसर पार्थ सारथी, शोध पर्यवेक्षक, इतिहास विभाग, ए. एम. कॉलेज, गया, मगध विश्वविद्यालय, बोधगया, बिहार
DOI: 10.70650/rpimj.2025v1i200006
DOI URL: https://doi.org/10.70650/rpimj.2025v1i200006
Issue: Vol. 1 ★ Issue 2 ★ October - December 2025
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आरंभिक अनुच्छेद :

कुर्किहार नामक स्थान गया जिले का एक प्रमुख पुरातात्विक स्थल है। यह नवादा-गया मुख्य सड़क मार्ग पर अवस्थित है। प्राचीन काल में इस क्षेत्र को कुक्कुट प्रदेश के नाम से जाना जाता था। ह्वेनसांग और इत्सिंग ने भी अपने यात्रा विवरणों में कुक्कुटपादगिरी नामक स्थल की चर्चा की है जो कुर्किहार नामक स्थल से साम्यता रखता है। इस स्थल के संबंध में नवीनतम अभिलेख विष्णुगुप्त के मानगरगाँव अभिलेख से जानकारी प्राप्त होती है। अभिलेख में अविमुक्तजन नामक व्यक्ति इस प्रदेश का निवासी था। यह क्षेत्र प्राचीन मगध क्षेत्र का भाग हुआ करता था। बेगलर तथा मेजर ने भी इस स्थल का वर्णन बौद्ध स्थल के रुप में किया है। इस क्षेत्र से अनेक पुरातात्विक महत्व की सामग्रियाँ प्राप्त हुई हैं। इन सामग्रियों में बौद्ध धर्म के विकास एवं मगध के ऐतिहासिक बिन्दुओं के संबंध में जानकारी प्राप्त होती है।